XposeTimesNewsDesk. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को दो दिवसीय दौरे पर भारत
पहुंचेंगे। शुक्रवार 5 दिसंबर को
पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने
के बाद यह पुतिन का पहला भारतीय दौरा है। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की इस समिट
का उद्देश्य अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद भारत-रूस के व्यापार को
बढ़ावा देना, परमाणु ऊर्जा
के लिए छोटा मॉड्यूल रिएक्टर बनाना और रक्षा सहयोग को मजबूत करने समेत कई और
मुद्दे हैं। इससे पहले पुतिन 6 दिसंबर 2021 में द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के लिए भारत
दौरे पर आये थे। पुतिन की भारत यात्रा ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। पूरी
दुनिया की निगाह भारत और रूस के इस सम्मेलन पर टिकी खास तौर से अमेरिका, जो भारत
पर अपने टैरिफ की मार से दबाव बनाना चाहता था लेकिन इसमें वह नाकाम रहा। वही अमेरिका
यह भी चाहता था कि भारत रूस से अपने व्यापार समझौते खत्म कर ले या कम करें इसमें
भी अमेरिका को मुंह की खानी पड़ी है।
एक ओर अमेरिका दुनिया भर के देशों के साथ भारत पर भी लगातार
रूस से व्यापार कम करने का दबाव बना रहा है,
ऐसे में पुतिन और पीएम मोदी की यह मुलाकात भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण होने
वाली है। इससे भारत और रूस के रक्षा समेत आर्थिक संबंधों को मजबूती मिलेगी।
पिछले हफ्ते से भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EEU) के बीच मुख्य व्यापार
समझौते (FTA) पर भी बातचीत
शुरू हो गई है। EEU में रूस समेत
5 देश शामिल हैं, जिनसे भारत टैरिफ कम करने और व्यापार में
मौजूदा बाधाओं को हटाने पर बात कर रहा है।
रूस की संसद के निचले सदन (स्टेट ड्यूमा) ने भारत-रूस के बीच होने वाली 18 फरवरी के RELOS (Reciprocal Exchange of Logistic Support) समझौते को हरी झंडी दिखा दी है। स्टेट ड्यूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन के अनुसार, "भारत-रूस के संबंध काफी पुराने हैं और हम इन्हें काफी महत्व देते हैं। इस समझौते का अनुमोदन करना दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने का काम करेगा।"
रूसी राष्ट्रपति पुतिन का 2021 का दौरा
व्लादिमीर पुतिन की
पिछली भारत यात्रा 6 दिसंबर 2021 को हुई थी। यह दौरा भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन (India–Russia Annual Summit) था। उस दौरान दोनों देशों
ने रक्षा सहयोग, व्यापार, ऊर्जा और अंतरिक्ष समेत विभिन्न
क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की थी। ख़ासतौर पर, रक्षा साझेदारी — जैसे मिसाइल प्रणाली और
सैन्य-तकनीकी सहयोग — पर प्रमुख जोर था।
भारत–रूस शिखर सम्मेलन के प्रमुख समझौते
1) सैन्य तकनीकी
सहयोग समझौता (2021–2031)
— विस्तृत विश्लेषण
यह 10-साला ढांचा सैन्य प्लेटफ़ॉर्म, गोला-बारूद, और संयुक्त विकास का रोडमैप तय करता
है।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत को दीर्घकालिक रक्षा आपूर्ति स्थिरता देना और रूस को विश्वसनीय बाजार सुनिश्चित करना था।
भारत के फायदे
रूस की रणनीति
2) AK-203 राइफल
उत्पादन — विस्तृत
रूस की प्रसिद्ध Kalashnikov सीरीज़ की आधुनिक राइफलें अब भारत के कोरवा (अमेठी) प्लांट में बनेंगी।
ये राइफलें भारतीय सेना की INSAS
को रिप्लेस करने के लिए हैं।
संभावित उत्पादन
3) ऊर्जा सहयोग
रूस भारत को तेल,
LNG और कोयला बड़ी मात्रा में देता है।
इस यात्रा में दोनों देश
दीर्घकालिक तेल आपूर्ति और संयुक्त निवेश पर सहमत हुए।
भारत के फायदे
रूस की रणनीति
4) साइबर
सुरक्षा MoU
दोनों देशों ने
5) अंतरिक्ष
सहयोग — विस्तार
भारत और रूस दशकों से अंतरिक्ष कार्यक्रमों में सहयोग करते
हैं।
2021 में मुख्य मुद्दा था:
गगनयान
6) सैन्य अभ्यास
व आदान-प्रदान
दोनों देशों ने इंद्र,
अविया इंद्र, नौसैनिक
अभ्यासों को और गहरा करने की योजना बनाई।
7) वित्तीय
ट्रांसफ़र Cooperation
रूस की SPFS
प्रणाली और भारत की UPI/RuPay
के लिंक पर चर्चा हुई।
इसका उद्देश्य था:
8) व्यापार
लक्ष्य (2030 तक)
मार्ग: INSTC,
Chennai–Vladivostok समुद्री लिंक,
Northern Sea Route।
भारत के लिए रणनीतिक फायदे
चीन के खिलाफ संतुलन
रूस भारत को महत्वपूर्ण सैन्य हार्डवेयर देता है, जो भारत-चीन तनाव में जरूरी है।
सस्ता ऊर्जा स्रोत
रूस–यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत ने रिकॉर्ड मात्रा में
सस्ता रूसी तेल खरीदा।
रक्षा आधुनिकीकरण
ब्रहमोस,
S-400, परमाणु पनडुब्बी सहयोग — रूस भारत के पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं में सबसे ऊपर
है।
बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था
भारत रूस के साथ मिलकर पश्चिम-केन्द्रित व्यवस्था को
संतुलित कर सकता है।
रूस के लिए रणनीतिक कारण
एशिया में विश्वसनीय साझेदार
भारत रूस के लिए चीन के अलावा एक सुरक्षित साझेदार है।
रक्षा निर्यात का बड़ा बाजार
रूस के हथियार निर्यात का लगभग 30–35% हिस्सा भारत से आता
है।
पश्चिमी दबावों से बचाव
भारत के साथ मजबूत आर्थिक/सैन्य संबंध रूस को अंतरराष्ट्रीय
स्तर पर संतुलन देते हैं।
(Commercial /
अन्य MoUs)
10. MoU — Opto-electronics Factory (देहरादून) और JSC Rosoboronexport.
11. Cooperation Agreement — Reserve Bank of India और Bank of Russia (cyber attacks से निपटने
में सहयोग).
12. MoU — ICAI (India) और IPAR
(Russia) के बीच पेशेवर लेखांकन सहयोग.
13. MoU — NTPC Ltd. और Inter
Rao-Export LLC (पावर सेक्टर सहयोग,
क्षमता निर्माण व एक्सपोर्ट सेवाएँ).
14. Memorandum — SAIL और Russian
SSC FSUE TsNIIchermet (धातु/मेटलर्जिकल टेक्नोलॉजी में सहयोग).
15. Memorandum — JSPL और SSC
FSUE TsNIIchermet (अनुसंधान व रणनीतिक काम में साझेदारी).
16. MoU — JSW Steel और SSC
FSUE TsNIIchermet (मेटलर्जिकल रिसर्च/टेक्नोलॉजी).
17. Statement of Intent — IOCL और SIBUR
के बीच (Paradip, Odisha में Dual Feed Cracker Unit की संभाव्यता
पर विचार).
18. MoU — National Sports University, Imphal और Russian International Olympic University
(RIOU), Sochi.
19. MoU — IISER Kolkata और A.V.
Zhirmunsky NSC of Marine Biology (Centre for Excellence in Blue Economy).
20. MoU — Lovely Professional University और Southern Federal University (शैक्षणिक/अनुसंधान
सहयोग).
21. Agreement for Academic Collaboration — University of Delhi और Skoltech University, Moscow (वैज्ञानिक/तकनीकी
प्रशिक्षण व कार्यक्रम).
22. Agreement — Sechenov (I.M. Sechenov First Moscow State Medical University) और University of Delhi (जीव-विज्ञान, नैनो-मेडिसिन, दवा-अनुसंधान आदि में सहयोग).
23. MoU — Uttar Pradesh FICCI और BCCI,
Russia (SME/अंतरराष्ट्रीय सहयोग हेतु).
24. MoU on manpower supplies — Magic Billion और Volshebny Milliard.
25. Statement of Intent — IOCL और Gazpromneft
(VGO Hydrocracking Technology व संबंधित प्रक्रिया/उपकरणों पर सहयोग).
26. MoU — Rosneft और OVL-led
Indian Consortium on Training Cooperation (तेल-गैस क्षेत्र में
प्रशिक्षण/शिक्षा कार्यक्रम).
27. MoU — Indian Trade Promotion Organisation और Roscongress Foundation (व्यापार
संवर्धन/बिलेट्रल ट्रेड को बढ़ावा).
28. Crude Oil Supply Agreement — Rosneft और Indian Oil Corporation Limited (Rosneft से IOCL के लिए कच्चा तेल
आपूर्ति समझौता / नवीनीकरण)।