हिन्दु घृणा और द्वेश से भरी कांग्रेस पार्टी
की नयी प्रंट ने भी संसद में साबित कर दिया कि वह भारतीय सनातन परंपरा के विरुद्ध
ही खड़ी है। कांग्रेस पार्टी के इंडी गठबंधन के बाद से तमाम सहयोगी दलों के नेताओं
ने लगातार सनातन विरोधी बयानबाजी की, सनतान धर्म को डेंगू, मलेरिया तक कहा गया,
इसके सर्वनाश की कसमें भी खायी गयी। हिन्दुओं से घृणा करने की एक और पटकथा लिखी “बालक बुद्धी” कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी
ने, जिसने संसद के पहले सत्र में हिन्दुओं को हिंसा करने वाला बताते हुए अनर्गल
टिप्णियां की। सवाल उठता है कि राहुल गांधी ने ऐसा करने की हिम्मत जुटाई कैसे,
हालांकि इसमें हिम्मत जुटाने की बात बेमानी है क्योंकि ये हिम्मत राहुल गांधी जैसे
तथाकथित नेता को भारतीय जनता नहीं ही दे रखी है।
लोक सभा चुनाव 2024 में कांग्रेस पार्टी को 99
सीट पर जीत मिली, तो कांग्रेस ने नैतिकता के आधार पर भाजपा को हार स्वीकार करने की
नसीहत देनी शुरु कर दी। नैतिकता के आधार पर तीसरी बार भी बहुमत से कोसों दूर रहने
वाली कांग्रेस पार्टी के कर्णधार राहुल ये महसूस नहीं कर पा रहे है कि वह इस चुनाव
में बुरी तरह से हार गये हैं, और इस बुरी हार को भी जीत समझने के मुगातले में वह
भारतीय सर्व समाज को उद्वेलित करने पर आमाद हैं।
वैसे तो राहुल गांधी का हिन्दू विरोध नया नहीं
है कपड़े के उपर जनेऊ पहनने वाले तथाकथित हिन्दू ये भूल जाते हैं कि उनके पिता
राजीव गांधी एक पारसी पिता फिरोज जहांगीर था, पारसी पिता की संतान राजीव के पुत्र
राहुल की माता इसाई पंथ से है, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी के दावे के
अनुसारन राहुल की माता सोनिया गांधी का असली नाम अंटोनियों माइनो है और वह रोमन
कैथोलिक यानी इसाई पंथ की पालनकर्ता है।
भारत में इसाईयों ने धर्मातरण का एक गिरोह चला
रखा है इससे कोई भी इनकार नहीं कर सकता है, वहीं आज तक ऐसे सबूत भी नहीं मिले है
कि एटोनियो माईनों अर्थात सोनिया गांधी ने हिन्दू धर्म अपनाया हो, तो जिनके संप्रदाय
का इतिहास रहा है कन्वर्जन उनके हिन्दू धर्म के प्रति आस्था वान होने की उम्मीद
करना बेमानी ही है, या यू कहें संसद में जो कुछ भी राहुल गांधी ने कहां वह उनके
संप्रदाय और विचारधार के उलट बिल्कुल भी नहीं है। गलती उस सर्व समाज की है जो
लगातार उधार में मिले गांधी नाम के परिवार को हिन्दु छद्मावरण के साथ भारत का
बहुसंख्य समाझ भी उन्हें सनातन धर्मावलंबी स्वीकार करने में जुटा हुआ है।
अगर हम राहुल गांधी की राजनैतिक उपलब्धी की
बात करें तो हिन्दु घृणा और हमारे देवी देवताओं के अपमान के साथ-साथ भारतीय समाज
को विखंडित करने, जैसे जातिवाद का जहर घोलना, जनता से झूठी गारंटी देने से इतर कुछ
भी नहीं है। राहुल गांधी की राजनैतिक समझ बताती है कि वह सत्ता की महत्वाकाक्षा से
एक कदम भी इधर-उधर नहीं सोच सकते। साथ ही यह भी कहना जरूरी है कि राहुल गांधी भारत
के उत्थान के लिए किसी भी प्रकार की विवेक पूर्ण कार्ययोजना के आधार पर शुन्य हैं।
तुष्टिकरण, ये वह राजनैतिक हथकंडा है जिसे किसी भी राजनैतिक दल ने अपना हथियार बनाने से परहेज नहीं किया, सवाल है कि तुष्टिकरण किसका, जवाब साफ है मुस्लिम समाज का, कांग्रेस पार्टी समेत उनके सभी सहयोगी दल मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है, भाजपा के विरोध में खड़ा मुसलमान ने 2024 के चुनाव में ये साबित किया है कि उनकी मजहबी कट्टर मानसिकता को किसी भी प्रकार के विकास नीति, उनके उत्थान की योजनाओं से बदला नहीं जा सकता है। इस लेख के शुरु में मैंने कहां था कि राहुल गांधी को सनातन के खिलाफ जहर उगलने की शक्ति कहां से मिलती है तो उसका जवाब उपर कि पंक्तियों में दिया गया है, मुस्लिम तुष्टिकरण से, कांग्रेस पार्टी को पता है कि इन अल्पसंख्यखों के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं सिर्फ इन्हें इनकी कट्टरता का समर्थन मिलते रहना चाहिए, और यही है राहुल गांधी जैसे हिन्दु द्रोही की ताकत।
मोनेश श्रीवास्तव, संपादक
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